ॐ Hanuman Chalisa

हनुमान चालीसा हिंदी में (अर्थ सहित)

अंतिम अद्यतन:

सम्पूर्ण हनुमान चालीसा हिंदी में अर्थ सहित: दो दोहे, चालीस चौपाइयाँ और अंत में एक दोहा। हर चौपाई के नीचे उसका सरल हिंदी अर्थ और रोमन पाठ भी दिया गया है।

सचित्र संस्करण खोलेंRoman lyrics

नाम
हनुमान चालीसा; 'चालीसा' शब्द 'चालीस' (40) से बना है
रचयिता
परंपरा के अनुसार गोस्वामी तुलसीदास
भाषा
अवधी (देवनागरी लिपि में)
रचना
2 प्रारंभिक दोहे + 40 चौपाइयाँ + 1 समापन दोहा = 43 भाग
पाठ में समय
लगभग 5 से 10 मिनट
विशेष दिन
मंगलवार और शनिवार
पढ़ते समय सुनें

हनुमान चालीसा का भजन पाठ, लगभग 8 मिनट 46 सेकंड।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हनुमान चालीसा किसने लिखी?

परंपरा के अनुसार हनुमान चालीसा के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास हैं, जिन्होंने रामचरितमानस की भी रचना की।

हनुमान चालीसा में कितनी चौपाइयाँ हैं?

हनुमान चालीसा में 40 चौपाइयाँ हैं। शुरू में दो दोहे और अंत में एक दोहा है, यानी कुल 43 भाग। 'चालीसा' शब्द 'चालीस' (40) से बना है।

हनुमान चालीसा किस भाषा में है?

हनुमान चालीसा अवधी भाषा में है, जो हिंदी की एक बोली है, और देवनागरी लिपि में लिखी जाती है।

हनुमान चालीसा का पाठ कब करना चाहिए?

परंपरा में मंगलवार और शनिवार हनुमान जी की पूजा के विशेष दिन माने जाते हैं। कई भक्त रोज़ सुबह या शाम पाठ करते हैं। पाठ में लगभग 5 से 10 मिनट लगते हैं।

हनुमान चालीसा की पहली चौपाई का अर्थ क्या है?

पहली चौपाई 'जय हनुमान ज्ञान गुन सागर' का अर्थ है - ज्ञान और गुणों के सागर हनुमान जी की जय हो।

हनुमान चालीसा - अर्थ सहित

दोहा 1

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनउं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥

Shri Guru charan saroj raj, nija manu mukuru sudhari.
Baranau Raghubar bimal jasu, jo dayaku phal chari.

अर्थ: गुरु के चरण-कमलों की धूल से अपने मन रूपी दर्पण को स्वच्छ करके मैं श्री रघुवीर (राम) के उस निर्मल यश का वर्णन करता हूँ, जो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष - चारों फल देने वाला है।

दोहा 2

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुधि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥

Buddhiheen tanu janike, sumirau Pavan-kumar.
Bal buddhi vidya dehu mohin, harahu kales bikar.

अर्थ: हे पवनकुमार! मैं स्वयं को बुद्धिहीन जानकर आपका स्मरण करता हूँ। मुझे बल, बुद्धि और विद्या दीजिए तथा मेरे सारे क्लेश और विकारों को हर लीजिए।

चौपाई 1

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुं लोक उजागर॥

Jai Hanuman gyan gun sagar.
Jai Kapis tihun lok ujagar.

अर्थ: हे हनुमान जी! आप ज्ञान और गुणों के सागर हैं। हे वानरराज! आपकी जय हो, आप तीनों लोकों को प्रकाशित करने वाले हैं।

चौपाई 2

राम दूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥

Ram doot atulit bal dhama.
Anjani-putra Pavansut nama.

अर्थ: आप श्रीराम के दूत हैं और अतुलनीय बल के धाम हैं। आप अंजनी के पुत्र और पवनपुत्र के नाम से जाने जाते हैं।

चौपाई 3

महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी॥

Mahabir Bikram Bajrangi.
Kumati nivar sumati ke sangi.

अर्थ: हे महावीर! आप पराक्रमी और वज्र के समान अंगों वाले (बजरंगी) हैं। आप कुबुद्धि को दूर करते हैं और सद्बुद्धि वालों के साथी हैं।

चौपाई 4

कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुंडल कुंचित केसा॥

Kanchan baran biraj subesa.
Kanan kundal kunchit kesa.

अर्थ: आपका रंग स्वर्ण के समान है और आप सुंदर वेश धारण किए हुए हैं। कानों में कुंडल हैं और आपके केश घुंघराले हैं।

चौपाई 5

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
कांधे मूंज जनेऊ साजै॥

Hath bajra au dhwaja birajai.
Kandhe moonj janeu sajai.

अर्थ: आपके हाथ में वज्र (गदा) और ध्वजा सुशोभित है तथा कंधे पर मूँज का जनेऊ शोभा देता है।

चौपाई 6

संकर सुवन केसरीनंदन।
तेज प्रताप महा जग बंदन॥

Sankar suvan Kesari nandan.
Tej pratap maha jag bandan.

अर्थ: आप भगवान शंकर के अंश हैं और केसरी के पुत्र हैं। आपका तेज और प्रताप इतना महान है कि पूरा संसार आपकी वंदना करता है।

चौपाई 7

विद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर॥

Vidyavan guni ati chatur.
Ram kaj karibe ko atur.

अर्थ: आप विद्वान, गुणवान और अत्यंत चतुर हैं तथा श्रीराम का कार्य करने के लिए सदा उत्सुक रहते हैं।

चौपाई 8

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया॥

Prabhu charitra sunibe ko rasiya.
Ram Lakhan Sita man basiya.

अर्थ: आपको प्रभु श्रीराम का चरित्र सुनने में आनंद आता है। श्रीराम, लक्ष्मण और सीता जी आपके हृदय में बसते हैं।

चौपाई 9

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
बिकट रूप धरि लंक जरावा॥

Sookshma roop dhari Siyahin dikhava.
Bikat roop dhari Lank jarava.

अर्थ: आपने अत्यंत छोटा रूप धारण करके सीता जी को दर्शन दिए और विकराल रूप धारण करके लंका को जला दिया।

चौपाई 10

भीम रूप धरि असुर सँहारे।
रामचंद्र के काज सँवारे॥

Bhim roop dhari asur sanhare.
Ramchandra ke kaj sanware.

अर्थ: आपने विशाल और भयंकर रूप धारण करके राक्षसों का संहार किया और श्रीरामचंद्र जी के कार्यों को सँवारा।

चौपाई 11

लाय सजीवन लखन जियाये।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये॥

Lay Sajivan Lakhan jiyaye.
Shri Raghubir harashi ur laye.

अर्थ: आपने संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी को जीवन दिया, जिससे प्रसन्न होकर श्रीरघुवीर ने आपको हृदय से लगा लिया।

चौपाई 12

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥

Raghupati kinhi bahut badai.
Tum mam priya Bharatahi sam bhai.

अर्थ: श्रीराम ने आपकी बहुत प्रशंसा की और कहा कि तुम मुझे भरत के समान प्रिय भाई हो।

चौपाई 13

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥

Sahas badan tumharo jas gavain.
As kahi Shripati kanth lagavain.

अर्थ: 'हज़ार मुखों से भी तुम्हारा यश गाया जाए' - ऐसा कहकर लक्ष्मीपति श्रीराम ने आपको गले से लगा लिया।

चौपाई 14

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा॥

Sankadik Brahmadi Munisa.
Narad Sarad sahit Ahisa.

अर्थ: सनक आदि ऋषि, ब्रह्मा आदि देवता, मुनिगण, नारद, सरस्वती और शेषनाग भी आपका गुणगान करते हैं।

चौपाई 15

जम कुबेर दिगपाल जहां ते।
कबि कोबिद कहि सके कहां ते॥

Jam Kuber Digpal jahan te.
Kabi kobid kahi sake kahan te.

अर्थ: यमराज, कुबेर और दिशाओं के रक्षक (दिक्पाल) भी आपका पूरा यश नहीं कह पाते, तो कवि और विद्वान कैसे कह सकते हैं?

चौपाई 16

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा॥

Tum upkar Sugrivahin kinha.
Ram milay raj pad dinha.

अर्थ: आपने सुग्रीव पर बड़ा उपकार किया - उन्हें श्रीराम से मिलवाया और राजपद दिलवाया।

चौपाई 17

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।
लंकेस्वर भए सब जग जाना॥

Tumharo mantra Bibhishan mana.
Lankeshwar bhaye sab jag jana.

अर्थ: विभीषण ने आपका उपदेश माना और वे लंका के राजा बने, यह बात सारा संसार जानता है।

चौपाई 18

जुग सहस्र जोजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥

Jug sahasra jojan par Bhanu.
Leelyo tahi madhur phal janu.

अर्थ: हज़ारों योजन दूर स्थित सूर्य को आपने मीठा फल समझकर निगल लिया था।

चौपाई 19

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लांघि गये अचरज नाहीं॥

Prabhu mudrika meli mukh mahin.
Jaladhi langhi gaye acharaj nahin.

अर्थ: प्रभु श्रीराम की अँगूठी को मुख में रखकर आप समुद्र को लाँघ गए - इसमें कोई आश्चर्य नहीं।

चौपाई 20

दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥

Durgam kaj jagat ke jete.
Sugam anugrah tumhre tete.

अर्थ: संसार के जितने भी कठिन कार्य हैं, वे आपकी कृपा से सरल हो जाते हैं।

चौपाई 21

राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥

Ram duare tum rakhavare.
Hot na agya binu paisare.

अर्थ: आप श्रीराम के द्वार के रखवाले हैं; आपकी आज्ञा के बिना कोई प्रवेश नहीं कर सकता।

चौपाई 22

सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रच्छक काहू को डर ना॥

Sab sukh lahai tumhari sarna.
Tum rachchak kahu ko dar na.

अर्थ: जो आपकी शरण में आता है, उसे सारे सुख मिलते हैं। आप जैसे रक्षक के रहते किसी का भय नहीं रहता।

चौपाई 23

आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हांक तें कांपै॥

Aapan tej samharo aapai.
Tinon lok hank te kanpai.

अर्थ: आप अपने तेज को स्वयं ही सँभाल सकते हैं। आपकी एक हुंकार से तीनों लोक काँप उठते हैं।

चौपाई 24

भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै॥

Bhoot pisach nikat nahin avai.
Mahabir jab naam sunavai.

अर्थ: जहाँ महावीर हनुमान जी का नाम लिया जाता है, वहाँ भूत-पिशाच पास नहीं आते।

चौपाई 25

नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा॥

Nasai rog harai sab peera.
Japat nirantar Hanumat beera.

अर्थ: वीर हनुमान जी के नाम का निरंतर जप करने से रोग नष्ट होते हैं और सारी पीड़ा दूर हो जाती है।

चौपाई 26

संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥

Sankat te Hanuman chhudavai.
Man kram bachan dhyan jo lavai.

अर्थ: जो मन, कर्म और वचन से हनुमान जी का ध्यान करता है, उसे वे संकटों से छुड़ा लेते हैं।

चौपाई 27

सब पर राम तपस्वी राजा।
तिन के काज सकल तुम साजा॥

Sab par Ram tapasvi raja.
Tin ke kaj sakal tum saja.

अर्थ: तपस्वी राजा श्रीराम सबसे ऊपर हैं, पर उनके सभी कार्यों को आपने ही सिद्ध किया।

चौपाई 28

और मनोरथ जो कोई लावै।
सोइ अमित जीवन फल पावै॥

Aur manorath jo koi lavai.
Soi amit jeevan phal pavai.

अर्थ: जो भी मनोकामना लेकर आपके पास आता है, उसे अनंत और उत्तम फल प्राप्त होता है।

चौपाई 29

चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा॥

Charon jug partap tumhara.
Hai parasiddha jagat ujiyara.

अर्थ: चारों युगों में आपका प्रताप फैला हुआ है; आपकी कीर्ति जगत में प्रकाश की तरह प्रसिद्ध है।

चौपाई 30

साधु संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे॥

Sadhu sant ke tum rakhavare.
Asur nikandan Ram dulare.

अर्थ: आप साधु-संतों के रक्षक हैं, राक्षसों का नाश करने वाले हैं और श्रीराम के दुलारे हैं।

चौपाई 31

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता॥

Asht siddhi nau nidhi ke data.
As bar deen Janki mata.

अर्थ: माता जानकी ने आपको वरदान दिया है कि आप आठ सिद्धियों और नौ निधियों के दाता होंगे।

चौपाई 32

राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा॥

Ram rasayan tumhare pasa.
Sada raho Raghupati ke dasa.

अर्थ: आपके पास राम-नाम रूपी रसायन (भक्ति का अमृत) है और आप सदा रघुपति के दास बने रहते हैं।

चौपाई 33

तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम जनम के दुख बिसरावै॥

Tumhare bhajan Ram ko pavai.
Janam janam ke dukh bisravai.

अर्थ: आपके भजन से श्रीराम की प्राप्ति होती है और जन्म-जन्मांतर के दुख भूल जाते हैं।

चौपाई 34

अंत काल रघुबर पुर जाई।
जहां जन्म हरिभक्त कहाई॥

Ant kaal Raghubar pur jai.
Jahan janma Hari-bhakt kahai.

अर्थ: अंत समय में भक्त श्रीराम के धाम को जाता है और वहाँ जन्म लेकर हरिभक्त कहलाता है।

चौपाई 35

और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई॥

Aur devata chitt na dharai.
Hanumat sei sarb sukh karai.

अर्थ: अन्य देवताओं में मन लगाने की आवश्यकता नहीं; हनुमान जी की सेवा से ही सब सुख मिल जाते हैं।

चौपाई 36

संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥

Sankat katai mitai sab peera.
Jo sumirai Hanumat balbeera.

अर्थ: जो बलवीर हनुमान जी का स्मरण करता है, उसके सारे संकट कट जाते हैं और सब पीड़ाएँ मिट जाती हैं।

चौपाई 37

जय जय जय हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥

Jai jai jai Hanuman Gosain.
Kripa karahu Gurudev ki nain.

अर्थ: हे हनुमान गोसाईं! आपकी जय हो, जय हो, जय हो! आप गुरुदेव की भाँति मुझ पर कृपा कीजिए।

चौपाई 38

जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई॥

Jo sat baar paath kar koi.
Chhootahi bandi maha sukh hoi.

अर्थ: जो इसका सौ बार पाठ करता है, वह बंधनों से छूट जाता है और उसे महान सुख प्राप्त होता है।

चौपाई 39

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा॥

Jo yah padhai Hanuman Chalisa.
Hoy siddhi sakhi Gaurisa.

अर्थ: जो यह हनुमान चालीसा पढ़ता है, उसे सिद्धि प्राप्त होती है - भगवान शंकर (गौरीश) इसके साक्षी हैं।

चौपाई 40

तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय महं डेरा॥

Tulsidas sada Hari chera.
Keejai Nath hriday mahn dera.

अर्थ: तुलसीदास सदा श्रीहरि के सेवक हैं; हे नाथ! आप मेरे हृदय में निवास कीजिए।

दोहा 3

पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥

Pavantanay sankat haran, mangal murati roop.
Ram Lakhan Sita sahit, hriday basahu sur bhoop.

अर्थ: हे पवनपुत्र! आप संकटों को हरने वाले और मंगल की मूर्ति हैं। हे देवराज! आप श्रीराम, लक्ष्मण और सीता जी सहित मेरे हृदय में निवास कीजिए।

पाठ कैसे करें

शांत स्थान पर बैठकर, हनुमान जी और श्रीराम का स्मरण करके पाठ आरंभ करें। शब्दों का उच्चारण धीरे और स्पष्ट रखें। अर्थ समझते हुए पढ़ने से पाठ में मन अधिक लगता है। अंग्रेज़ी अर्थ के लिए Meaning पृष्ठ देखें।